Sunday, August 13, 2006

अस्मिता

क्या मैं हूँ वह नहीं

जो याद नहीं अब,

जो है वह किसी और की स्मृति नहीं क्या

जिनसे जानता पहचानता अपने आपको

मनुष्य ही नहीं पेड़- पंछी

हवा आकाश

मौन धरती

घर खिड़की

एक कविता का निश्वास !


पर ये नहीं किसी और की स्म़ृति क्या ?

जो याद है बस

भूलकर कुछ


13.8.06 © मोहन राणा