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Tuesday, September 19, 2023

एकांत में रोशनदान : मोहन राणा Ekaant Men Roshandaan : Mohan Rana

                                                                 नया कविता संग्रह

                                           एकांत में रोशनदान (2023)

 


                                नयन पब्लिकेशन  -- https://amzn.eu/d/9ddsXkJ
  • प्रकाशक ‏ : ‎ Nayan Publication (7 सितंबर 2023)
  • भाषा ‏ : ‎ हिंदी
  • पेपरबैक ‏ : ‎ 130 पेज
  • ISBN-10 ‏ : ‎ 8195429920
  • ISBN-13 ‏ : ‎ 978-8195429929

 

"मोहन राणा अनूठे कवि हैं। उनका रहस्य को शब्दों की टपरी के नीचे अर्थ की छाँव में क्षण भर के लिए आमंत्रित कर लेने का हुनर लाजवाब है। उनके अपने शब्दों में ‘कवि जब लिखता ही नहीं बल्कि कविता में जीता है तो रचना कालातीत हो जाती है।’ वे कविता को जीते हुए उसके कालातीत होने की घटना के साक्षी बनते हैं। उनकी कविता साधु की तरह रमण करती है, यायावर कि तरह विचरण करती है, परिदों की तरह उड़ान भरती है और अनचीन्हे, अनुबूझे गन्तव्यों से गुज़रकर सूक्ष्म रहस्य की छाँव में एक परिपूर्ण पथिक की भाँति विश्राम करती है। मोहन राणा की कविताएँ कुलाँचे भरती हैं- शब्द के पार अर्थ की ओर, अर्थ के पार भाव की ओर, भाव के पार बोध की ओर, बोध के पार निविड़ मौन की ओर ; और मौन के पार शून्य की ओर। "
- चैतन्य प्रकाश योगी


समीक्षा / Review
https://www.raagdelhi.com/mohan-rana-ekant-me-roshandaan-review-by-naresh-shandilya/

Wednesday, January 03, 2018

दूर खिड़की पास दिल्ली



दूर खिड़की पास दिल्ली

भाग रहा हूँ पर दूरियाँ बढ़ती चली जाती हैं
6900 किलोमीटर दूर ही रह गई
भाग रहा हूँ नज़दीक जाने कहीं
दूर खिड़की पास दिल्ली
पर गंतव्य छूट रहा पीछे कहीं
जो कल सोचा वह आज नहीं
लपेटता जैसे किसी और तह में ख़ुद को
तस्मों को ढीला करता नंगे पाँव दौड़ते

 [29.11.2008] 

- मोहन राणा



(रेत का पुल /कविता संग्रह : 2012)

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