फोन आया ...मैं कुछ सोच ही रहा था,आश्चर्य को आश्चर्य ही होना चाहिए ना.
मैंने कभी किसी अन्य जीव को यह कहते नहीं सुना काश मैं मनुष्य होता...
लेकिन जब मैं किसी चिड़िया को हवा में कलाबाजी करते देखता हूँ तो सोचता हूँ काश में उस उड़ान को भर
पाता.
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चुनी हुई कविताओं का चयन यह संग्रह - मुखौटे में दो चेहरे मोहन राणा © (2022) प्रकाशक - नयन पब्लिकेशन
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Ret Ka Pul | Revised Second Edition | रेत का पुल संशोधित दूसरा संस्करण © 2022 Paperback Publisher ...