Thursday, October 08, 2009

काबुलीवाला कहता है

मौसम तो जैसा है ठीक ही है
गरमी हो या सर्दी पतझर हो या बरसात
अगर में जग जाऊँ तो अच्छा है
पता नहीं पर दिल्ली में सब सो रहे हैं
यह कैसा अनाम मौसम,

पता नहीं वे किसके पैर हैं
जिन्हें दिखता नहीं
कहते हैं अमरीका के पाँव दबाए जा रहे हैं
दिल्ली में सब सो रहे हैं
किसकी यह नींद किसका यह सपना
सोचता काबुलीवाला
जागकर किसी को बताऊँ जो हैरान ना हो,
उनींदे में पुकारता जागते जागते रहो