Sunday, February 05, 2006

एक गीत

लोकल सेंसबरी सुपर मार्केट में लाईन लंबी थी रविवार को वह 4.30 बजे ही बंद हो जाता है, मैं सामान को ट्रॉली से निकाल कर काउंटर पर रख ही रहा था कि ...हिन्दी के कुछ शब्द सुनाई दिए
बगल वाली लाइन में दो लड़के एक लड़की के साथ गप कर रहे थे... फिर वह सुरीली आवाज में गाने लगी

राम करे ऐसा हो जाए मेरी निंदिया तोहे मिल जाए

मैं जागूँ तू सो जाए मैं जागूँ तू सो जाए


कुछ समझ नहीं आया दोपहर बाद 4.30 बजे इंग्लैंड के एक प्रांतीय शहर के सुपरमार्केट में वह खुलकर क्यों गाने लगी..
शायद वह गाना मन में आ गया... और उससे रहा नहीं गया.

What I Was Not

 Mohan Rana's poems weave a rich tapestry of memory and nostalgia, a journeying through present living. Explore the lyrical beauty of th...