

चिंगारी फूटते ही पूरे तिब्बत में आंदोलन भड़क गया है, पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर अपना स्पष्ट मत रखने में हिचकिचाहट क्यों हो रही है क्या इसमें उसे हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. लगभग बीस बरस पहले भी ल्हासा में विरोध की लहर उठी थी पर जबरन दबा दी गई, पर इस बार दबाना कठिन होगा, बिल्ली के लिए भी
और चूहों के लिए भी.. ..हो सकता है इस चिंगारी से जाने कितनी मशालें आगे जलें, परिवर्तन का समय आ गया है.
चीनी दबाव दिल्ली पर इतना है कि राजधानी के गलियारों में मंडराने वाले शेरों की बोलती बंद है,
खबरों के मुताबिक चीन बिना वर्दी वाले सैनिकों को नेपाल की सीमा के भीतर तैनात कर चुका है

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